अखिलेश यादव ने बाहुबली मुख़्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी और उसके बेटे मन्नु अंसारी को टिकट देकर यह साफ कर दिया है की माननीय अखिलेश यादव यूपी में माफियाओं और उनके करीबियों को राजनितिक पनाह दे रहे हैं. इससे तो साफ पता चलता है की जो जितना बड़ा अपराधी होगा अखिलेश उसे उतनी बड़ी बाहें फैलाकर सीने से लगायेंगे.
सिबगतुल्लाह अंसारी पहले भी 2007 में सपा के टिकट पर गाजीपुर के मोहमदपुर विधान सभा क्षेत्र से चुनाव जीत चुके हैं. और 2012 में भी अपने भाई अफज़ल और मुख़्तार की बनाई हुयी पार्टी कौमी एकता की टिकट पर विधानसभा चुनाव के लिए लडे और जीते हैं. इस वक़्त यूपी खासकर पूर्वांचल में अपराध का कैसा बोलबाला था आप सभी अच्छी तरह से जानते हैं. 2017 में बसपा से टिकट लेकर मुह्मदाबाद सीट से बिधानसभा पहुंचे थे.
योगी सरकार में मुख़्तार अंसारी परिवार और उनके करीबियों के 84 लाइसेंस निलंबित हुए हैं.
भविष्य में वैसे राजनेता दुबारा देश और सेना के हितों को अपने स्वार्थ की खातिर अनदेखा नहीं करेंगे. जिस तरह से इंडियन आर्मी द्वारा किये गए अभियान को जनता ने और नेताओं ने सराहा वैसी ही सराहना एयर स्ट्राइक करने वाले हमारे वीर वायु सैनिकों और उनके ऑफिसर्स की होनी चाहिए. पूरी वायु सेना की सराहना होनी चाहिए और साथ ही देश के नेतृत्व की सराहना होनी चाहिए जिसे इसका सारा श्रेय जाता है.
दंगों और बलवों वाला क्षेत्र : पश्चिमी यूपी ! आज यह कहते हुए मुझे बहुत शर्म आ रही है. क्या यही पहचान लेकर जीना चाहते हैं हम. नहीं! हमें इस मानसिकता से बाहर निकलना होगा. सिर्फ पश्चिम उत्तर प्रदेश ही नहीं सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश और पूरे भारत को दंगा मुक्त बनाना होगा. इसकी शुरुआत हमें अपने ही क्षेत्र से करनी होगी.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पड़ने वाले ज़िले मुख्य रूप से सहारनपुर, मेरठ, हाशिमपुरा, मुज्जफरनगर और शामली में आये दिन दंगे होते रहते थे. पिछली सरकारों के काल में खासकर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की सरकार के दोरान इन क्षेत्रों में आये दिन दंगे होते रहते थे.
इतिहास किसी का नहीं बल्कि सत्य और समय का होता है। धरती वीरों से कभी खाली नहीं रही। उत्साहपूर्वक आगे बढ़ते रहना ही जन्म लेने की सार्थकता है।
आज जब कश्मीर में “धारा 370 और 35 ए” के हटने से दलितों को नागरिकता का अधिकार प्राप्त हो गया है तो हमारे संविधान निर्माता डॉ0 भीमराव अम्बेडकर भी केंद्र सरकार के प्रयासों की प्रशंसा कर रहे होंगे. डॉ0 अम्बेडकर ने धारा 370 का ड्राफ्ट बनाने के समय नेहरु का विरोध किया था और ड्राफ्ट तैयार करने से मना कर दिया था.